प्राकृतिक खेती में असम की क्षमता पर ध्यान केंद्रित करते हुए, गुजरात के राज्यपाल और प्राकृतिक कृषि प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ आचार्य देवव्रत ने कहा है कि आने वाले भविष्य में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने हाल ही में गुवाहाटी में नेचुरल फार्मिंग कॉन्क्लेव 2023 में अपना मुख्य भाषण देते हुए ये बातें कहीं।
गुजरात के राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाने का जन आंदोलन आने वाले वर्षों में व्यापक रूप से सफल होगा और जितनी जल्दी किसान इस बदलाव से जुड़ेंगे, उतना ही उन्हें इसका लाभ मिलेगा।
असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंत विश्व शर्मा ने किसानों के बीच प्राकृतिक खेती पर जागरूकता पैदा करने के लिए केंद्र सरकार की पहल पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि असम भी खेती के अपने पारंपरिक तरीके को अपनाने का इच्छुक है। उन्होंने कृषि उत्पादों में यूरिया, रसायनों, उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग की ओर इशारा किया, जिससे असम में कैंसर, गुर्दे, यकृत जैसी विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मनुष्यों के जोखिम में वृद्धि हुई है। डॉ शर्मा ने 3,24,065 किसानों में से चयनित लाभार्थियों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के चेक भी वितरित किए, जो वर्ष 2021-22 के लिए फसल बीमा के 236 करोड़ रुपये के वितरण से लाभान्वित होंगे।
लाभार्थियों में से नगांव के एक किसान वैचांग तेरांग थे। तेरांग कहा, मैं आमतौर पर बत्तख और मुर्गी के अलावा धान की खेती करता हूं। पिछली बाढ़ में, मैंने सब कुछ खो दिया। मैं निराश हो गया। हालांकि, जब होजाई कृषि कार्यालय ने मुझे यह बताने के लिए फोन किया कि मैं पीएमएफबीवाई के तहत लाभार्थियों में से एक होऊंगा, तो मुझे वास्तव में राहत महसूस हुई।
कृषि मंत्री अतुल बोरा ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य का कृषि क्षेत्र पारंपरिक खेती में कृषि-क्रांति के लिए तैयार हो रहा है। बोरा ने यह भी कहा कि असम के 15 जिलों में 20,000 से अधिक किसान अगले पांच वर्षों में प्राकृतिक खेती पद्धति से 20 हजार हेक्टेयर फसल की खेती करेंगे।
सम्मेलन में राज्य भर के 3,500 से अधिक किसानों ने भाग लिया। गुजरात की प्रथम महिला दर्शना देवी, उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी, असम सरकार की कैबिनेट मंत्री नंदिता गार्लोसा और जोगेन मोहन, कृषि उत्पाद आयुक्त और अतिरिक्त मुख्य सचिव आशीष कुमार भूटानी, असम कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति विद्युत डेका व अन्य बैठक में उपस्थित थे।











