कहते हैं कि समय पर उठाया गया एक सही कदम भविष्य के संकट से रक्षा करता है। प्राथमिक विद्यालय में हम जो सबसे आम कहावत सीखते हैं, वह सरकारों और प्रशासकों द्वारा समान रूप से सबसे अधिक उपेक्षित ज्ञान है। हालांकि, जो लोग इसका पालन करते हैं, उन्हें हमेशा नहीं तो अधिकांश मामलों में लाभ मिलता है।
असम सरकार द्वारा बाल विवाह के विरुद्ध चलाया गया सघन अभियान ऐसा ही एक “समय पर उठाया गया कदम” है। प्रारम्भिक परिणाम यह दर्शाते हैं कि इसने भविष्य में अनेक समस्याओं को रोकने की क्षमता दिखाई है। कानूनी ढांचे पर काम करने के साथ ही, डॉ. हिमंत विश्वशर्मा की सरकार ने बालिकाओं की शिक्षा, सशक्तीकरण और आर्थिक स्थिरता पर भी समान रूप से ध्यान दिया। परिणामस्वरूप अप्रैल 2022 से मार्च 2025 के बीच असम में बालिकाओं के बाल विवाह में 84% की गिरावट दर्ज हुई है — जो पूरे देश के अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है। लड़कों के बाल विवाह में यह प्रतिशत 91% तक है। यह आँकड़े सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब) द्वारा किए गए सर्वेक्षण में सामने आए हैं।
“Tipping Point to Zero: Evidence Towards a Child Marriage Free India” शीर्षक वाली रिपोर्ट में, इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय राज्य के कठोर और प्रभावशाली कानूनी प्रवर्तन तंत्र को दिया गया है। हालांकि, इस दूरदर्शी नीति दृष्टिकोण का वास्तविक प्रभाव हम अगले एक दशक में ही देख पाएंगे — जब यही बच्चे शिक्षा और मेहनत के बल पर वैश्विक मंच पर अपना नाम स्थापित करेंगे।










