असम की कानूनी और सामाजिक सुधार यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज करते हुए, राज्य विधानसभा ने हाल ही में असम बहुविवाह निषेध विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी। यह विधेयक बहु विवाह करने वालों के लिए 10 वर्ष तक के कारावास सहित कड़े दंड का प्रावधान करता है।
विधेयक पेश किए जाने के बाद विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने कानून की आवश्यकता को उचित ठहराने के लिए तुर्किये का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक “इस्लाम के खिलाफ नहीं है” और लोगों से इसका समर्थन करने तथा “सच्चे मुस्लिम बनने” का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा, “इस्लाम बहुविवाह को बढ़ावा नहीं दे सकता। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो आपको सच्चे मुस्लिम बनने का अवसर मिलेगा। यह विधेयक इस्लाम के खिलाफ नहीं है। सच्चे इस्लामी लोग इस कानून का स्वागत करेंगे। तुर्किये जैसे देशों ने भी बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया है; पाकिस्तान में भी एक मध्यस्थता परिषद है।”
असम विधानसभा द्वारा पारित यह विधेयक राज्य में बहुविवाह और बहुविवाह संबंधी प्रथाओं को प्रतिबंधित करने और समाप्त करने के साथ-साथ उससे जुड़े एवं आनुषंगिक विषयों का प्रावधान करता है।
मसौदा कानून असम भर में लागू होगा, लेकिन छठी अनुसूची के क्षेत्रों में और भारत के संविधान के अनुच्छेद 366 की धारा (25) के तहत परिभाषित तथा अनुच्छेद 342 के साथ पठित किसी भी अनुसूचित जनजाति के सदस्यों पर यह लागू नहीं होगा। यह कानून अवैध बहुविवाह में संलिप्त अपराधियों के लिए सात वर्ष तक के कारावास और पूर्व विवाह को छिपाने के अपराध में दस वर्ष तक के कारावास का प्रावधान करता है। इसके अतिरिक्त, नए अधिनियम के तहत अवैध विवाह में शामिल महिलाओं को मुआवजा और कानूनी संरक्षण का अधिकार मिलेगा। बार-बार हिंसा में लिप्त अपराधियों के लिए और भी कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।
विधेयक में कहा गया है, गांवबूढ़ा, ग्रामप्रधान, काजी, बहुविवाही विवाह के पक्षकारों के माता-पिता या वैध अभिभावक, जो बेईमानी या धोखाधड़ी से किसी ऐसे विवाह को छिपाते हैं या जानबूझकर उसके आयोजन अथवा संपादन में भाग लेते हैं, उन्हें दो वर्ष तक के कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह हमारी नारी शक्ति के लिए न्याय की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने लिखा, असम संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। महिलाओं के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। असम बहुविवाह निषेध विधेयक 2025 के माध्यम से हम कानूनी संरक्षण, कड़े दंड और वास्तविक जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं। हमारी नारी शक्ति के लिए न्याय की दिशा में एक मजबूत कदम।
सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए असम राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. श्यामल सैकिया ने असम बार्ता से बातचीत में कहा, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा के सक्षम नेतृत्व में असम सरकार ने असम बहुविवाह निषेध विधेयक 2025 के रूप में एक समयोचित निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य असम में बहुविवाह और बहुविवाही विवाह की प्रथाओं पर रोक लगाना और उन्हें समाप्त करना है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस विधेयक को व्यवहार में लागू करने की प्रक्रिया में कुछ महीने लग सकते हैं, क्योंकि राज्य में इसके प्रवर्तन के लिए भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति आवश्यक होगी। सैकिया ने कहा, यह विधेयक निश्चित रूप से विशेष रूप से महिलाओं के लिए, प्रत्येक व्यक्ति की वैध पत्नी के लिए उपयोगी होगा। साथ ही यह जन्म दर को नियंत्रित करने और परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में भी सहायक सिद्ध होगा। सैकिया ने इस तरह के सराहनीय प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार भी व्यक्त किया। वहीं, बाल रक्षा भारत (सेव द चिल्ड्रन) की असम एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र की प्रबंधक कृतांजलि कश्यप ने विधेयक के पारित होने का स्वागत करते हुए कमजोर महिलाओं और बच्चों पर इसके संभावित प्रभाव को रेखांकित किया।
कश्यप ने इस संवाददाता से कहा, यह उन महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अक्सर बहुविवाही परिवारों का सबसे अधिक दुष्प्रभाव झेलते हैं। ऐसे पारिवारिक ढांचे में पलने वाले कई बच्चे असुरक्षा, उपेक्षा और सीमित संसाधनों की समस्या का सामना करते हैं।
उन्होंने आगे कहा, कानूनी सुरक्षा प्रावधानों को लागू करके सरकार न केवल महिलाओं के अधिकारों की रक्षा कर रही है, बल्कि समग्र बाल संरक्षण व्यवस्था को भी मजबूत बना रही है। एक स्थिर पारिवारिक संरचना सीधे तौर पर बच्चे के भावनात्मक, सामाजिक और शैक्षणिक कल्याण में योगदान देती है। कश्यप ने यह भी जोड़ा कि यह कानून लागू होने के बाद अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करेगा और शोषणकारी प्रथाओं को कम करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, यह विधेयक समुदायों को अधिक समान और न्यायसंगत पारिवारिक व्यवस्था अपनाने के लिए प्रेरित करेगा और महिलाओं को बिना भय के कानूनी उपाय अपनाने के लिए सशक्त बनाएगा।










