पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) की खनिज और कोयला क्षमता को उजागर करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, खान मंत्रालय ने कोयला मंत्रालय और असम सरकार के सहयोग से गुवाहाटी में दूसरा पूर्वोत्तर भूविज्ञान और खनन मंत्रियों का सम्मेलन आयोजित किया है। ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण के साथ आयोजित इस सम्मेलन में केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने भाग लिया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए रेड्डी ने कहा, “पूर्वोत्तर क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी की रक्षा के लिए वैध और टिकाऊ खनन प्रथाएं महत्वपूर्ण हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार जमीनी स्तर पर वास्तविक समय की निगरानी और प्रवर्तन को बढ़ाने के लिए पूर्ण समर्थन और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगी।
इस आयोजन का उद्देश्य टिकाऊ और वैज्ञानिक खनन को बढ़ावा देना, संसाधन क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी में सुधार करना और संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करना है।
केंद्रीय मंत्री ने पूर्वोत्तर राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे आवश्यक सुधार आरंभ करें तथा अन्य खनिज समृद्ध राज्यों की तरह अपने समृद्ध खनिज भंडारों का पूर्ण दोहन करने के लिए समयबद्ध, ठोस कार्ययोजना विकसित करें।
केंद्रीय मंत्री ने पूर्वोत्तर में भूवैज्ञानिक क्षमता तथा भारत के पूर्वोत्तर में खनन, पूर्वोत्तर क्षेत्र में कोयला संसाधन एवं अन्वेषण पर पुस्तक तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में वाणिज्यिक कोयला खनन पर विवरणिका सहित कई दस्तावेज भी जारी किए। क्षेत्र में खनिज अन्वेषण तथा क्षेत्रीय भूस्खलन पूर्वानुमान को बढ़ावा देने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण तथा पूर्वोत्तर राज्यों में विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य सरकार एजेंसियों के बीच समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए।
सम्मेलन में भाग लेने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने कहा, “प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुर उपलब्धता के साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र में खनन क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। क्षेत्र में खनन के भविष्य पर विचार-विमर्श करने तथा पर्यावरणीय आवश्यकताओं को संतुलित करने के लिए एक उत्कृष्ट मंच, दूसरे पूर्वोत्तर खनन मंत्रियों के सम्मेलन में सभी पूर्वोत्तर राज्यों के मंत्री तथा उद्योग हितधारक एक नया रास्ता तैयार करने के लिए एकत्रित हुए।”
उन्होंने यह भी कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांत के अनुरूप स्थिरता और शून्य अपशिष्ट खनन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जैसा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने पर्यावरण के साथ जुड़े विकास पर कल्पना की है। “असम ने हाल ही में इस क्षेत्र में 46,000 करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिबद्धता देखी है और हमने लघु खनिज अन्वेषण को बढ़ावा देने के लिए राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट को भी मंजूरी दी है। हम इस क्षेत्र को खोल रहे हैं और इस क्षेत्र में मौजूद अवसरों का स्थायी रूप से दोहन करने के लिए आवश्यक सुधार ला रहे हैं।”










