जब मैं यह लिख रहा हूं, मुझे पूरा भरोसा है कि आप में से बहुत-से लोगों ने हमारे आइकॉन जुबीन गर्ग की आखिरी फिल्म ‘रोइ रोइ बिनाले’ देखी होगी — उन्हें श्रद्धांजलि देने और सिनेमा के प्रति अपने प्रेम के रूप में।
हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल ने यह निर्णय लिया है कि इस फिल्म की टिकट बिक्री से राज्य को जो जीएसटी प्राप्त होगा, उसे दिवंगत गायक द्वारा स्थापित उस फाउंडेशन में जमा किया जाएगा, जिसका उद्देश्य सदैव निस्वार्थ रहा है।
कैबिनेट सर्वसम्मति से मानती है कि हम जुबीन की स्मृति को सदैव जीवित रखने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। हम उन “वोइसेज” का भी सम्मान करते हैं जो उनकी रचनाओं और आदर्शों को पूरे विश्व में आगे बढ़ाने के सुझाव दे रहे हैं।
हम जानते हैं कि जुबीन जनता के थे और हमेशा जनता के रहेंगे। और हम यह भी जानते हैं कि सरकार जनता की है और जनता के हित में ही शासन करती है। इसलिए जनता की रुचि-इच्छा का सम्मान हर सरकार का कर्तव्य है और सरकार की नीयत हमेशा जनता के सर्वोत्तम हित को प्रतिबिंबित करनी चाहिए। यही राजधर्म है जिसका हम सभी पालन करते हैं। इसीलिए हमारी सरकार जुबीन के प्रति न्याय सुनिश्चित करने के लिए जो कर रही है, वह भी जनता के सर्वोच्च हित को ध्यान में रखते हुए कर रही है। यह “न्याय” उनके व्यक्तित्व, उनकी आभा, उनके मानवीय गुणों और सभी के प्रति उनके प्रेम को सम्मान देने के अर्थ में है। इससे कम कुछ भी उस व्यक्ति के साथ न्याय नहीं होगा जिसने अपने राज्य और अपने असमिया समाज के हित को जीवन भर सर्वोपरि रखा। हमने पहले ही कई समितियां गठित कर दी हैं ताकि हम जो भी कदम उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उठाएं, वह अद्वितीय हों और स्थायी प्रभाव छोड़ें।
अक्तूबर शासन के लिहाज से, विशेष रूप से महिलाओं के लिए, एक ऐतिहासिक महीना रहा। निजुत मोइना 2.0, अरुणोदय 3.0 और एमएमयूए योजना को जमीनी हकीकतों को ध्यान में रखते हुए नए फीचर्स के साथ और गति दी गई।
निजुत मोइना हमारी सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है, जिसके दीर्घकालिक स्वरूप से असम का भविष्य बदलने की क्षमता है। मैंने हमेशा माना है कि बेटी को सशक्त करना, समाज को सशक्त करना है। स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक बेटियों की शिक्षा पर जोर देकर हम आत्मनिर्भर पीढ़ी तैयार कर रहे हैं, और शिक्षा के अभाव में उत्पन्न होने वाले नकारात्मक सामाजिक दुष्प्रभावों को रोक रहे हैं। जब हम यह कर लेंगे, तो हमें विश्वास है कि इनमें से बहुत सी बेटियां आगे चलकर उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाएंगी, जहां एमएमयूए जैसी हमारी योजनाएं उनके काम आएंगी।
एक मायने में देखें तो हमारी नीतियां ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज—दोनों स्तरों पर एक-दूसरे से जुड़ी और पूरक हैं। अरुणोदय को हम भूल नहीं सकते, जो स्वास्थ्य और शिक्षा—दोनों में एक बफर और सहायक की भूमिका निभाता है।
राज्य के कोने-कोने के दौरे में, मुझे असंख्य माताओं और बहनों ने यह कहा है कि वे हमारे प्रयासों की सराहना करती हैं। इसे ही मैं “जन-केन्द्रित शासन” कहूंगा—ऐसी योजनाएं जो दीर्घकाल में समाज को लाभ पहुंचाएं और लोगों को आत्मनिर्भर बनाएं, न कि दीर्घकाल तक सरकार पर निर्भर।
हम जो कुछ भी कर रहे हैं उसका मतलब यह नहीं है कि सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। दरअसल, इसी महीने हमने सरकारी रिक्तियों को भरने के लिए 15,000 से ज्यादा युवाओं की भर्ती की है। इसमें पुलिस भी शामिल है। इन भर्तियों के जरिये हमने निराशावादियों को यह संदेश दिया है कि चुनावी वादों से आगे भी कुछ किया जा सकता है। हमने एक लाख नौकरियों का वादा किया था, लेकिन हम सरकारी नौकरियों के दो लाख के करीब पहुंच गए हैं। मैं अपने पाठकों को याद दिला दूं कि ये भर्तियां पूरी तरह से पारदर्शी और योग्यता के आधार पर हो रही हैं। लंबे समय के बाद, सरकार सरकारी भर्तियों में लोगों का विश्वास वापस पाने में कामयाब रही है, जो वास्तव में हम सभी के लिए गर्व की बात है, न कि सिर्फ उस पार्टी के लिए जिसे सत्ता में चुना गया है। यह सरकार नामक संस्था की जीत है, न कि किसी एक व्यक्ति या उसके मंत्रिमंडल की। केवल एक मजबूत नेतृत्व ही ऐसा कर सकता है। इसीलिए मैं इस बात पर जोर देता रहता हूं कि नेताओं के पास उस समाज के प्रति दीर्घकालिक दृष्टिकोण होना चाहिए जिसका वे हिस्सा हैं।हमारा सीएम-फ्लाइट कार्यक्रम, जो पुनः युवा और कौशल-उन्मुख है, शुरू हो गया है। इसके पहले चरण में हमारे युवाओं को जापानी भाषा सीखने का अवसर मिलेगा ताकि वे भारत में जापानी कंपनियों के लिए काम करने की संभावनाओं का पता लगा सकें और साथ ही रोजगार के अवसरों के लिए उगते सूरज की धरती पर भी जा सकें। कुशल कार्यबल का मूल्य कंपनियों और देशों के लिए एक परिसंपत्ति है। मैं इस कॉलम के सभी पाठकों को सूचित करना चाहता हूं कि यह प्रक्रिया अभी शुरू हुई है। जापानी भाषा से आगे बढ़कर, हम अपने युवाओं को सशक्त बनाने और उन्हें विकल्प देने के लिए अन्य भाषाओं की ओर बढ़ेंगे। किसी के पास जितने अधिक विकल्प होंगे, वह उतना ही अधिक सशक्त महसूस करेगा।






