प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के अपने दो दिवसीय दौरे पर गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र के कवि, भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका के जन्म शताब्दी समारोह में भाग लिया। समारोह की शुरुआत एक भव्य सांस्कृतिक श्रद्धांजलि के साथ हुई, जहां असम भर से आए 1,000 से अधिक कलाकारों ने सुधाकंठ की चिरस्थायी विरासत को सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए संगीतकार की कालजयी रचनाओं पर प्रस्तुति दी।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सभी कलाकारों की सराहना की और कहा कि यहां का प्रत्येक कार्यक्रम एक नया कीर्तिमान स्थापित करता है। उन्होंने कहा कि भूपेन दा को सभी लोग प्यार से “सुधाकंठ” कहते हैं, के जन्म शताब्दी समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है, जिन्होंने भारत की भावनाओं को आवाज दिया, संगीत को संवेदनशीलता से जोड़ा, अपने संगीत के माध्यम से भारत के सपनों को संजोया और मां गंगा के माध्यम से मां भारती की करुणा का वर्णन किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भूपेन दा ने कई अमर रचनाएं रचीं, जिनके स्वरों ने भारत को जोड़ा और पीढ़ी-दर-पीढ़ी भारतीयों के झकझोरती रही, पीएम मोदी ने कहा कि भले ही भूपेन दा आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत और उनकी आवाज आज भी भारत की विकास यात्रा के साक्षी हैं और उसे ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भूपेन हजारिका के गीतों, उनके संदेशों और उनके जीवन की यात्रा को घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है।

इस अवसर पर, प्रख्यात लेखिका अनुराधा शर्मा पुजारी द्वारा लिखित डॉ. भूपेन हजारिका की जीवनी का विमोचन किया गया। इस जीवनी का 22 भाषाओं में अनुवाद किया गया है। इसके अलावा, 100 रुपये का एक स्मारक सिक्का भी जारी किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा, भूपेन हजारिका ने अपना संपूर्ण जीवन संगीत की सेवा को समर्पित किया। उन्होंने ने कहा कि भूपेन दा ने जिन आदर्शों को जिया और जिन अनुभवों से गुजरे, उसकी झलक उनके गीतों में दिखाई देती है। उनके संगीत में मां भारती के प्रति गहरा प्रेम, उनके “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना के प्रति जीवंत प्रतिबद्धता से उपजा था। उन्होंने बताया कि भूपेन दा का जन्म पूर्वोत्तर में हुआ और ब्रह्मपुत्र की पावन लहरों ने उन्हें संगीत सिखाया। उनकी संगीत यात्रा, जो ब्रह्मपुत्र से आरंभ हुई थी, गंगा की बहती लहरों से निखरकर सिद्धि में बदल गई। भूपेन दा को उन्होंने एक ऐसे यायावर के रूप में वर्णित किया, जिसने पूरे भारत का भ्रमण किया और पीएचडी के लिए अमेरिका भी गए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जीवन के हर पड़ाव पर भूपेन दा असम की मिट्टी से जुड़े रहे और एक सच्चे पुत्र बने रहे।
भूपेन दा को भारत की एकता और अखंडता का महान नायक बताते हुए पीएम मोदी ने याद किया कि दशकों पहले जब पूर्वोत्तर की उपेक्षा होती थी और यहां हिंसा एवं अलगाववाद का माहौल था, तब भी भूपेन दा निरंतर भारत की एकता को आवाज देते रहे। उन्होंने कहा कि भूपेन दा ने एक समृद्ध पूर्वोत्तर का सपना देखा था और इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का गान किया था।
पीएम मोदी ने विश्वास दिलाया कि सरकार भूपेन दा के पूर्वोत्तर के सपनों को साकार करने के लिए दिन-रात काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भूपेन दा को भारत रत्न प्रदान कर सरकार ने पूर्वोत्तर के सपनों और स्वाभिमान का सम्मान किया है और इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है। उन्होंने बताया कि असम और अरुणाचल प्रदेश को जोड़ने वाले देश के सबसे लंबे पुलों में से एक का नाम भूपेन हजारिका सेतु रखा गया है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि असम और पूरा पूर्वोत्तर तीव्र गति से प्रगति कर रहा है और विकास के हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां वास्तव में राष्ट्र की ओर से भूपेन दा को सच्ची श्रद्धांजलि है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी रही हों, असम ने हमेशा देश के स्वाभिमान को स्वर दिया है, और यही भावना भूपेन दा के गीतों में भी दिखाई देती है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1962 के युद्ध के दौरान, असम ने संघर्ष को प्रत्यक्ष देखा था और उस समय भूपेन दा ने अपने संगीत के माध्यम से देश के संकल्प को दृढ़ किया था। उन्होंने भूपेन दा के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर यह आह्वान किया कि हमें देश के लिए आत्मनिर्भरता का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने वोकल फॉर लोकल आंदोलन के ब्रांड एंबेसडर बनने की अपील की। उन्होंने सभी से स्थानीय सामान बेचने और खरीदने का आग्रह किया।
पीएम मोदी ने कहा कि भूपेन दा ने जिस नए भारत का सपना तब देखा था, वह आज देश का सामूहिक संकल्प बन गया है। उन्होंने सभी से इस प्रतिबद्धता के साथ स्वयं को जोड़ने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हर प्रयास और हर संकल्प के केंद्र में रखा जाए।










