रोजगार के माध्यम से युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए असम सरकार के मिशन में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए, असम डायरेक्ट रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन्स ( एडीआरई) 2025 के ग्रेड III और ग्रेड IV की परीक्षाओं में 12,000 से अधिक युवाओं ने सफलता प्राप्त की है, जिसके परिणाम हाल ही में घोषित किए गए।
ग्रेड III में 7,650 और ग्रेड IV में 4,604 नियुक्तियां 50 राज्य विभागों में हुई हैं, जो कि पारदर्शी और मेधावी भर्ती प्रक्रिया के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने परिणाम घोषित होने के बाद एक्स पर पोस्ट किया – “एक बार फिर हमने स्वच्छ, पारदर्शी और योग्यता आधारित भर्ती के अपने वादे को निभाया है। आज एडीआरई और अन्य परिणामों की घोषणा के साथ, असम गर्व से खड़ा है – सार्वजनिक नियुक्तियों में ईमानदारी, निष्पक्षता और अवसर का नया मानदंड स्थापित करते हुए हमने एक नया रिकॉर्ड भी बनाया है – हमने जितना वादा किया था उससे अधिक प्रदान किया है। हमने 1 लाख नियुक्तियों का संकल्प लिया था, और आज हम लगभग 2 लाख नियुक्तियां करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं – यह असम के युवाओं के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का सच्चा प्रमाण है।”
उन्होंने आगे कहा – “असम के लोगों ने निष्पक्षता और पारदर्शिता की रक्षा करने के लिए हम पर भरोसा किया था। इन परिणामों से हमने यह साबित कर दिया है कि जब शासन उद्देश्य और सत्यनिष्ठा के साथ संचालित होता है तब ईमानदारी और योग्यता विजय प्राप्त करती है।”

राज्य स्तरीय भर्ती आयोग (क्लास III) के अध्यक्ष और अतिरिक्त मुख्य सचिव अजय तिवारी ने पुष्टि की कि कृषि विभाग (1,850), पंचायती एवं ग्रामीण विकास विभाग (873), और स्कूली शिक्षा (581) सहित अन्य विभागों में भी रिक्तियों को भरा जाएगा। सितंबर 2025 में आयोजित इस परीक्षा में 28 जिलों में लगभग 17 लाख उम्मीदवारों ने भाग लिया था। हालांकि आधिकारिक घोषणा राज्य भर में सुर्खियां बनी, परन्तु अनेक अभ्यर्थियों के लिए यह वर्षों की मेहनत, त्याग और मौन धैर्य का चरम क्षण था।
श्रीभूमि की सफल अभ्यर्थी महेश्वेता देब चौधरी ने असम वार्ता से बातचीत में कहा- “धैर्य और अनुशासन ही वास्तविक शिक्षक हैं। अपने माता-पिता की एकमात्र संतान होने के नाते मुझे विश्वास है कि इस नियुक्ति के माध्यम से मैं अपने परिवार में महत्वपूर्ण योगदान दे पाऊंगी।”
भर्ती प्रक्रिया पर बात करते हुए उन्होंने कहा, प्रक्रिया बिल्कुल पारदर्शी थी, हमें हमारे ओएमआर शीट्स की स्कैन कॉपी भी उपलब्ध कराई गई थी। पूरी परीक्षा निष्पक्ष तरीके से हुई, जिसके लिए मैं संतुष्ट हूं। इससे योग्य अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की पक्षपात की चिंता किए बिना सरकारी नौकरी प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
“हर बेताबी भरी रात मुझे यहां तक लाई है,” यह कहना है धेमाजी जिले के जोनाई की स्वर्णाली बरुआ का, जो लंबे समय से सरकार की सेवा करने का सपना देखती थीं। उन्होंने इस न्यूजलेटर को बताया कि उनके पिता एक छोटे व्यवसायी हैं और माता गृहिणी; दोनों ने उनकी पढ़ाई के लिए अनगिनत त्याग किए। एडीआरई का परिणाम घोषित होने पर उन त्यागों की सार्थकता सिद्ध हो गई। उन्होंने कहा, रिजल्ट चेक करते समय मैं कांप रही थी। फिर मेरा रोल नंबर दिखाई दिया। कुछ क्षण के लिए सब थम सा गया-संघर्ष, शंकाएं, थकान-सबकुछ खुशी के आंसुओं में बदल गया। कम संसाधनों, सीमित कोचिंग और कठिन परिस्थितियों में की गई खुद के अध्ययन की बदौलत मिली यह सफलता-ग्रामीण असम की दृढ़ता का प्रतीक है। स्वर्णाली ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
“उनके दूरदर्शी प्रयासों के कारण आज असम में हर वर्ग, हर आर्थिक स्तर के युवा को सरकारी नौकरी पाने का अवसर मिल रहा है—जो एक दशक पहले तक लगभग अविश्वसनीय था।” नलबाड़ी के निखिल मेधी के लिए यह जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि उनके परिवार का उद्धार है।
“मेरे माता-पिता सरकारी कर्मचारी हैं। वे हमेशा चाहते थे कि मैं भी सरकारी सेवा में आऊं। मुझे खुशी है कि मैं उनका सपना पूरा कर सका।”
परिणाम देखकर निखिल को भी विश्वास नहीं हुआ। “मैं बार-बार ब्राउजर को रिफ्रेश कर रहा था—लग रहा था शायद सपना है।”
पिछली सार्वजनिक परीक्षाओं में असफलताओं के बावजूद उनका अटूट संकल्प—निखिल की कहानी को विशेष रूप से प्रेरणादायक बनाता है।
अब वे अपने नए दायित्व के माध्यम से सार्वजनिक शिक्षा सुधार में योगदान देने की आशा रखते हैं।
मोनिका गोगोई मानती हैं कि असम को डॉ. हिमंत विश्वशर्मा जैसे मुख्यमंत्री का सौभाग्य प्राप्त है, जिन्होंने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इतनी दूरदर्शिता से काम किया है। उन्होंने कहा, असम ने हमें एक नई सुबह दी है। अब केवल ईमानदार और योग्य अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति मिल रही है।
उनके अनुसार एडीआरई का परिणाम उनके अथक परिश्रम और सरकारी सहयोग का परिणाम है। उनके पिता एक छोटे व्यवसायी हैं। मोनिका को रिश्तेदारों की शंकाओं का भी सामना करना पड़ा, जिनको उनके चयन की संभावना पर संदेह था, लेकिन वे कभी विचलित नहीं हुईं। मोनिका ने कहा, जब मैंने अपना नाम देखा, तो मेरी पहली भावना अपने माता-पिता, शिक्षकों और इस निष्पक्ष प्रणाली के प्रति कृतज्ञता की थी। मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा-
“जब मुझे इन युवा सफल अभ्यर्थियों की हृदयस्पर्शी कहानियां पढ़ने को मिलती हैं, तो मेरा हृदय अपार आनंद से भर उठता है। मेरी सबसे बड़ी संतुष्टि यही है कि अब ये युवा अपने माता-पिता और समाज की ईमानदारी से सेवा कर पाएंगे। उधर, राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने 5,614 पदों के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए हैं, जिनमें पुलिस कॉन्स्टेबल (एबी/यूबी), एसआई सहित अन्य पद शामिल हैं।
कार्बी आंगलोंग के मुख्य कार्यकारी सदस्य तुलिराम रोंगहान ने गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए पोस्ट किया—
“हाल ही में घोषित परिणामों में कार्बी आंगलोंग के हमारे कई प्रतिभाशाली युवाओं का चयन कॉन्स्टेबल और अन्य पदों पर असम पुलिस, संबद्ध विभागों, डीएमई नर्स, अग्नि वीर (भारतीय सेना) और अन्य सेवाओं में हुआ है। हम उनकी उपलब्धियों पर अत्यंत गर्वित और प्रसन्न हैं। आपके परिश्रम, संकल्प और अनुशासन ने हमारे जिले का मान बढ़ाया है।
हम माननीय मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा और उनके नेतृत्व के प्रति भी हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने ऐसे अवसर निर्मित किए और हमारे युवा वर्ग को राज्य और राष्ट्र की सेवा के लिए प्रेरित किया।
सभी चयनित अभ्यर्थियों से कामना है कि वे इसी समर्पण और निष्ठा के साथ सेवा करते रहें और कार्बी आंगलोंग को और अधिक गौरवान्वित करें!”










