असम ने अपने चहेते कलाकार को जिस तरह की विदाई दी, वह भावपूर्ण और भव्य विदाई इतिहास में एक अनोखे अध्यायन के रूप में दर्ज होगा। एक ऐसा अध्याय जिसमें एक कलाकार के प्रति अटूट प्रेम दर्शाने के लिए शासन और जनता के बीच न केवल एकजुटता दिखी बल्कि अटूट प्रेम भी देखने को मिला।अपने प्रिय गायक को श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ी भीड़, जिसने जाति, लिंग और धर्म की सारी सीमाएं तोड़ दीं, वह अभूतपूर्व थी। खास बात यह रही कि इस जनसैलाब की अगुवाई युवाओं ने की, हालांकि कुछेक कानून-व्यवस्था संबंधी घटनाएं भी हुईं। लेकिन जो बात पूरे भारत और सात समंदर पार तक सबके सामने स्पष्ट रूप से आई, वह थी असम सरकार की भूमिका – इस अप्रत्याशित परिस्थिति को संभालने में उसकी तत्परता और कुशलता।
सिंगापुर में जुबीन के निधन की खबर ने सभी को आश्चर्यचकित और बेहद दुःखी कर दिया था। हालांकि, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने असम में वर्तमान में बेमिसाल एक अद्भुत कलाकार को उचित विदाई देने के लिए तुरंत कदम उठाया। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री का खुद आकर गायक के पार्थिव शरीर को लेने के दृश्यों ने इस व्यक्ति के महत्व और इस घटना की व्यापकता को स्पष्ट रूप से दर्शाया। उसके बाद से, जब तक उनकी अस्थियां उनके पैतृक शहर जोरहाट नहीं ले जाई गईं, सरकार ने ही आगे बढ़कर नेतृत्व किया, और यह सही भी था, क्योंकि जुबीन जनता के कलाकार थे।










