हाल के वर्षों में, असम के लोगों ने सतत विकास की दिशा में उल्लेखनीय रुख दिखाया है, जिसमें सौर ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा के लिए एक लोकप्रिय और व्यावहारिक विकल्प के रूप में उभर कर सामने आई है। गुवाहाटी जैसे शहरी केंद्रों से लेकर राज्य के कोने-कोने तक, लोग पर्यावरण के अनुकूल समाधान के रूप में तेजी से रूफटॉप सोलर सिस्टम की ओर रुख कर रहे हैं। यह हरित परिवर्तन पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति बढ़ती जागरूकता, बिजली की बढ़ती लागत और असम सरकार व केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना जैसे योजनाओं के तहत किए जा रहे सक्रिय प्रयासों के कारण संभव हो पाया है।
सभी आय वर्ग के लोग रूफटॉप सौर पैनलों को अपना रहे हैं। असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एपीडीसीएल) की ओर से सुगम सरकारी सब्सिडी और स्थापित करने की सरल प्रक्रियाओं की ने सौर ऊर्जा को पहले से कहीं अधिक सुलभ बना दिया है।
सौर ऊर्जा स्थापना की प्रगति के बारे में असम वार्ता को जानकारी देते हुए, एपीडीसीएल के मुख्य महाप्रबंधक (एनईआर) बिजय शंकर बरुआ ने कहा, “2024-25 में 5,000 के लक्ष्य के मुकाबले 10,723 रूफटॉप सौर संयंत्र स्थापित किए गए। हालांकि, 2025-2026 के लिए निर्धारित 30,000 के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 14,815 रूफटॉप सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। कुल मिलाकर, 84 मेगावाट की कुल क्षमता के साथ 25,538 रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।”
बरुआ के अनुसार, दैनिक जीवन में लोगों द्वारा अपनाए जाने वाले विभिन्न स्थायी तरीकों के मद्देनजर, रूफटॉप सौर ऊर्जा व्यवस्था उनके लिए एक स्वाभाविक विकल्प बन गई है। लाखों परिवारों को स्वच्छ सौर ऊर्जा का उपयोग करने में सक्षम बनाने के दृष्टिकोण के साथ, एपीडीसीएल ने राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना के व्यापक जागरूकता और निर्बाध कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है।
बरुआ ने आगे कहा, उपभोक्ताओं के लिए मुख्य प्रेरकों में से एक बिजली बिलों में पर्याप्त कमी का ठोस लाभ है, कई रूफटॉप सोलर लाभार्थियों ने नेट मीटरिंग व्यवस्था के कार्यान्वयन के माध्यम से नेट-जीरो बिल भी प्राप्त किया है।
एपीडीसीएल ने आवासीय उपभोक्ताओं के लिए नेट मीटर लगाने में सक्रिय रूप से मदद की है, 10 किलोवाट क्षमता तक की स्थापनाओं के लिए तकनीकी व्यवहार्यता अनुमोदन को माफ किया है, समय पर निरीक्षण और कमीशनिंग सुनिश्चित की है, जिससे समग्र उपभोक्ता अनुभव सुव्यवस्थित हुआ है।
चुनौतियों का उल्लेख करते हुए, बरुआ ने इस न्यूजलेटर को बताया, “असम भर में आवासीय रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन के कार्यान्वयन के दौरान छोटी, लेकिन उल्लेखनीय चुनौतियों की पहचान की गई है, जैसे आसानी से उपलब्ध बैंक ऋणों की कमी और ऋण प्राप्ति के दौरान विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं का अनुपालन, जिसके परिणामस्वरूप संभावित आवेदकों के लिए देरी और अनिश्चितता होती है। एक और चुनौती असम के भीतर और आसपास सौर पैनल और घटक निर्माण इकाइयों की अनुपस्थिति है, जो देश के अन्य हिस्सों से खरीद पर निर्भर हैं। इससे कुल परियोजना लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होती है और साथ ही परियोजना के पूरा होने की समयसीमा में भी देरी होती है।
उन्होंने कहा कि राज्य में पर्याप्त बुनियादी ढांचा विकास से प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की प्रगति में तेजी आएगी। उत्तरी लखीमपुर के ढकुआखाना के शरत चुटिया अपना बिजली बिल देखकर सुखद आश्चर्यचकित हैं, मैंने जनवरी 2025 में रूफटॉप सोलर लगवाया था और तब से मेरा बिल शून्य है, यहां तक कि इस भीषण गर्मी के मौसम में भी। मुझे लगता है कि यह स्थापना एक समझदारी भरा फैसला रहा है।
इसी तरह, गुवाहाटी के अमृत चंद्र दास मार्च 2025 में स्थापना के बाद अपने बिजली बिल में 50% से अधिक की कमी देख रहे हैं। उन्होंने बताया, पहले हमारा मासिक बिल लगभग 6,000-7,000 रुपये हुआ करता था। अब यह लगभग 2000-3000 रुपये है।
राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा केवल घरों की छतों तक सीमित नहीं है। राज्य भर में बड़े पैमाने पर सौर परियोजनाएं चल रही हैं, जो एक अधिक आत्मनिर्भर और स्वच्छ ऊर्जा ग्रिड की नींव रख रही हैं। कुछ प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं:
• धुबड़ी जिले के खुदीगांव पार्ट-II में 70 मेगावाट की भू-स्थित सौर ऊर्जा परियोजना।
• शोणितपुर जिले के बोरसोला में 50 मेगावाट की भू-स्थित सौर ऊर्जा परियोजना।
• राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, असम के अंतर्गत चयनित अस्पतालों में बैटरी बैकअप के साथ ग्रिड-इंटरैक्टिव रूफटॉप सौर प्रणालियां।
• समग्र शिक्षा, असम के अंतर्गत विभिन्न पीएम-श्री स्कूलों में ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड सौर प्रणालियां।जनता भवन और गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) जैसे प्रमुख सरकारी प्रतिष्ठानों में ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सौर प्रणालियां स्थापित की गई हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 3.9 मेगावाट है और जिनका वित्तपोषण राज्य बजट से किया जा रहा है।











