असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने राज्य की लाखों जनता के साथ मिलकर असमिया सांस्कृतिक के महान स्तंभ जुबिन गर्ग को दिल से अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनका 19 सितंबर, 2025 को सिंगापुर में एक दुर्घटना में निधन हो गया। जुबिन दा, जैसा कि उन्हें उनके करोड़ों प्रशंसक प्यार से पुकारते थे, के पार्थिव शरीर को जब 21 सितंबर की सुबह इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, नई दिल्ली पर लाया गया, तब मुख्यमंत्री वहां खुद मौजूद थे और उन्होंने अंतिम यात्रा की संपूर्ण योजना और क्रियान्वयन का नेतृत्व किया।
डॉ. शर्मा ने कई दिनों तक अपने सभी आधिकारिक कार्यों को स्थगित कर चार दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की, जिससे दिवंगत महान कलाकार को एक सम्मानजनक विदाई दी जा सके। सिंगापुर में कानूनी और चिकित्सकीय औपचारिकताओं के समन्वय, कलाकार के परिवार के साथ समन्वय, दुख में डूबे राज्य को संभालने और लाखों लोगों के अंतिम दर्शन की व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने बखूबी निभाई। गृह एवं राजनीतिक विभाग, जन संपर्क विभाग और सांस्कृतिक विभाग को अंतिम संस्कार से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं और कार्यक्रमों का संचालन करने के निर्देश दिए गए थे।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने दिल की बात साझा करते हुए लिखा:
“दिल्ली एयरपोर्ट पर हमारे प्रिय जुबिन को श्रद्धांजलि अर्पित की। सच कहूं तो उनका निधन अभी भी यकीन नहीं हो रहा – ये सब किसी बुरे सपने जैसा लग रहा है। सुरक्षित यात्रा करो, जुबिन! तुम हमारे दिलों में हमेशा जीवित रहोगे – हमेशा के लिए।”
अपने मन में जुबिन का अमर गीत ‘मायाबिनी रातिर बुकुत’ गुनगुनाते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि “असम तुम्हारी अमर विरासत का भार सदा उठाएगा।”
गुवाहाटी में उनके पार्थिव शरीर को लाने वाली उड़ान के उतरने के बाद, उनके शव को शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए पहले उनके काहिलिपाड़ा स्थित निवास और फिर अर्जुन भोगेश्वर बरुआ स्टेडियम ले जाया गया। लाखों की संख्या में प्रशंसक सड़कों के किनारे खड़े होकर और शव यात्रा के साथ चलकर उन्हें अंतिम विदाई देने उमड़े। राज्य सरकार ने जन भावनाओं को देखते हुए दो दिन का समय अंतिम दर्शन के लिए निर्धारित किया। लगभग दस लाख प्रशंसकों ने स्टेडियम पहुंचकर अपने नायक के अंतिम दर्शन किए।

मुख्यमंत्री के अनुसार, अपनी प्रिय संतान को अंतिम विदाई देने के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। उन्होंने राजा की तरह जीवन जिया और अब उन्हें उसी प्रकार स्वर्ग भेजा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि इन सभी निर्णयों में ज़ुबीन के परिवार से राय और सहमति ली जाए। ऐसे ही एक चर्चा का परिणाम था कि उनका अंतिम संस्कार कमरकुची, सोनापुर में किया गया, जहां 23 सितंबर को ज़ुबीन को राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई। यह स्थल दो दिनों में तैयार कर दिया गया।
गामोछा में लिपटे उनके पार्थिव शरीर को तापमान नियंत्रित कांच के ताबूत में रखा गया और अर्जुन भोगेश्वर बरूआ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से फूलों से सजे एम्बुलेंस में कमरकुची ले जाया गया। उनके 85 वर्षीय पिता मोहीनी मोहन बरठाकुर, पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग और अन्य पारिवारिक सदस्य इस अंतिम यात्रा में साथ थे।
उनके असंख्य प्रशंसकों ने एम्बुलेंस का पीछा किया, और कई लोग गुवाहाटी से सोनापुर तक के रास्ते में खड़े होकर अपने चहेते सितारे की एक अंतिम झलक पाने के लिए इंतजार करते रहे। हजारों लोग श्मशान स्थल पर एकत्र हुए, और “जॉय जुबीन दा” के नारों के साथ-साथ उनके प्रसिद्ध गीत “मायाबीनी” को एक स्वर में गाते हुए, नम आंखों और बंदूकों की सलामी के बीच उनका अंतिम संस्कार किया गया।
भारत सरकार, विभिन्न राज्य एजेंसियों, स्वदेशी संगठनों, और कलाकारों के प्रतिनिधियों ने इस असम के चहेते कलाकार को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री ने अपने श्रद्धांजलि संदेश में लिखा:
“प्यारे जुबीन को आखिरी बार देखने का अवसर मिला। अब से वह असम की आत्मा, सोच और दिलों में जीवित रहेंगे। अलविदा जुबीन। तुम्हारे जैसा कोई और नहीं हो सकता। हम तुम्हें हमेशा तुम्हारे गीतों और विचारों के माध्यम से जीवित रखेंगे। हमेशा से जुबीन का प्रशंसक रहा हूं, हमेशा रहूंगा। ओम् शांति!”
अब इस स्थल को दिवंगत गायक की स्मृति स्थल (मेमोरियल) के रूप में विकसित किया जाएगा।

परिवार के साथ हुई एक और चर्चा का परिणाम यह हुआ कि उनके अस्थि-अवशेष को उनके पैतृक नगर जोरहाट ले जाया गया, जहां 1 अक्तूबर को लाखों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए, सांस्कृतिक कार्य विभाग ने दिवंगत गायक जुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए उनकी अस्थियों को संग्रहित किया है। इस संबंध में जानकारी देते हुए सांस्कृतिक कार्य मंत्री बिमल बोरा ने मीडिया को बताया, चूंकि जुबीन गर्ग असम की जनता के थे, जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा, जिसके माध्यम से असम के किसी भी संगठन या संस्था द्वारा इन पवित्र अस्थियों का एक अंश प्राप्त करने के लिए आवेदन किया जा सकेगा। निर्धारित नियमों के अनुसार, प्राप्त आवेदनों के आधार पर अस्थियां वितरित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, अस्थियों का एक भाग जोरहाट भी भेजा जाएगा, जहां इस महान कलाकार की दूसरी स्मृति स्थल का निर्माण किया जाएगा।
जोरहाट में दिनभर चले इस कार्यक्रम में राज्य भर से सभी वर्गों के एक लाख से अधिक शुभचिंतकों ने भाग लिया। लगभग 2,000 श्रद्धालु, जैसे कि ढेकियाखोवा बर नामघर और मोइनापोरिया नामघर से आए हुए भक्तों ने सामूहिक प्रार्थनाएं, भक्ति गायन और संकीर्तन में भाग लिया।
विधियों का आयोजन भव्यता के साथ किया गया, जिसमें 100 गायन-बायन कलाकारों ने भक्ति गीत गाए, और 500 अन्य कलाकारों ने दीहा नाम का गायन किया।
दिवंगत गायक की पत्नी गरिमा गर्ग, अपने 45 परिजनों के साथ इस आयोजन में शामिल हुईं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा: “जोरहाट ने जुबीन की सांस्कृतिक यात्रा को आकार देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यद्यपि हमें उनके अंतिम संस्कार की रस्में उनके पिता की स्वास्थ्य स्थिति के कारण सोनापुर में करनी पड़ीं, परंतु आज इस मांगलिक अनुष्ठान के माध्यम से हम सब एक साथ मिलकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।”
मंत्री बिमल बोरा, जिन्होंने जोरहाट में सभी व्यवस्थाओं की निजी निगरानी की, ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया:
जोरहाट – हमारे प्रिय जुबीन के जीवन की यादों से जुड़ी हुई एक भूमि। आज, जब हम उनकी आत्मा की शांति के लिए पवित्र तेरहवीं का आयोजन कर रहे हैं, उनकी अस्थियों को पुष्पांजलि अर्पित की।जुबीन गर्ग सदैव हमारे बीच अमर रहेंगे। इस समारोह में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और राज्य मंत्री अतुल बोरा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।











